Tuesday, September 5, 2017

देश का नागरिक बॉर्डर पर लड़े बिना भी देश को महान कैसे बना सकता है ? जानिये रहस्य

 

क्यों आवश्यक है राष्ट्रवादी होना,Why necessary to be Patriotic,BRB Medical College,Gorakhpur,UP,Army Soldiers,Jawansबहुत ही दुखद अनुभव होता है एक राष्ट्रबंधु फौजी भाई को २२ वर्ष की किशोर आयु में शहीद होते देखना।
बहुत ही दुखद अनुभव होता है जब BRD मेडिकल कॉलेज जैसे अमानवीय हादसे में ३३ बच्चे काल के गाल में समा जाते है। बहुत ही दुखद अनुभव होता है जब कोई एक्सीडेंट होता है, पुलिया टूट जाती है, बिल्डिंग गिर जाती है और ऐसी समस्त मानव निर्मित आपदाओं में हज़ारों निर्दोष भ्रष्ट तंत्र के कुकर्मों की भेंट चढ़ जाते है।   

एक सिविलियन होने के नाते कभी अनुभव नहीं कर सकते कि एक जवान का परिवार एक जवान बेटे  के शहीद होने के बाद कितनी बार शहीद होता है ? बार बार शहीद होता है, हर रोज शहीद होता है। आखिर ऐसा क्यों??
हम ये कभी नहीं समझ पाते कि देश के एक नागरिक ने अनुचित पैसा कमाने के लिए एक दुसरे नागरिक से जीने का अधिकार भी क्यों छीन लिया ? इसे आप देश की जीत कहेंगे या हार ? परन्तु ये पीड़ा हमें समझनी पड़ेगी , राष्ट्रवादी होने का ठेका केवल जवानों के माथे क्यों ? राष्ट्रवादी होने का ठेका केवल कुछ गिने चुने व्यक्तियों संगठनों या फ़ौज के तक क्यों ?

असहिष्णुता : एक कट्टर उपराष्ट्रपति को एक राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री का सटीक जवाब

अब आप कहेंगे कि हम तो आम आदमी है जी , और हम क्या कर सकते है इसमें ?
तो इसका एक ही उत्तर है और यह उत्तर है कि "हर भारतीय को राष्ट्रवादी होना पड़ेगा।"
राष्ट्र हित में एक एक छोटे से छोटा और बड़े से बड़े कदम उठाने को तत्पर रहना होगा।
तभी तो जीवन सार्थक होगा, अन्यथा जीवन तो पशुओं का भी होता है।

सड़क पर थूकना भी राष्ट्रद्रोह है , रोड पर कचरा डालना भी राष्ट्रद्रोह है , चोरी , झूठ, मक्कारी, सरकारी संपत्ति का नुक्सान, गलत जगह  पार्किंग, सड़क तोडना, रिश्वत लेना, रिश्वत देना, भ्रष्टाचार  करना, सरकारी इमारतों को नुक्सान पहुंचाना,ट्रैन का बिस्तर और अन्य सामान चुराकर घर ले आना, बिना बिल का सामान बेंचना, खरीदना और भी अन्य हज़ारों ऐसे कार्य है जो हमें पता है की ये अनुचित है फिर भी हम करते है , ऐसे समस्त कार्य राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में ही तो आते है। ऐसे  कार्यों का त्याग करना होगा तभी हमारा मनुष्य जीवन सार्थक हो पाएगा। 

विदेशी वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग भी कोई राष्ट्र प्रेम नहीं है, जिस चीन को हम एक साल में 5000000000000 (पचास  हज़ार करोड़ ) की कमाई हम  करवाते है उसकी वस्तुएं क्रय करके वही हमें आँखें दिखा जाता है, क्या यही हमारा राष्ट्र धर्म है ? यदि नहीं तो राष्ट्रवादी बनो, समस्त विदेशी वस्तुओं व् सेवाओं का बहिष्कार करो ! तभी एक राष्ट्र की शक्ति का पता लगेगा विदेशी ताकतों को। 

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क्यों आवश्यक है राष्ट्रवादी होना ?
क्यों की देश की सरकार का ७० प्रतिशत बजट तो ऐसे निकम्मे देश वासियों के द्वारा किये गए गलत कार्यों से निपटने में ही खर्च हो जाता है।  सोचो यदि सरकार इस ७० प्रतिशत बजट का उपयोग आर्मी को मजबूत करने में करे तो दुनिया में हमारी आर्मी सबसे बड़ी और विश्व विजयी बन जायेगी।

सोचो की यदि इस ७० प्रतिशत धन का उपयोग हमारी सरकार स्कूल, अस्पताल, सड़क, रेल, हवाई जहाज़, रोजगार केंद्र इत्यादि कार्यों में खर्च करे तो कैसा परिवर्तन आ जायेगा देश में ?

जिस दिन ऐसा होगा उस दिन मेरे फ़ौजी भाई शहीद होने ही बंद हो जायेंगे क्योंकि देश के पास इतनी धन सम्पदा होगी की दुनिया का कोई भी देश हमारी ओर आँख उठाने से पहले दस बार नहीं सौ बार सोचेगा।
जिस दिन ऐसा हो जायेगा उस दिन BRD Medical College, Gorakhpur जैसी घटनाएं घटनी बंद हो जाएगी।

चोरी लूट पाट और आपराधिक घटनाएं अपने आप कम हो जाएगी, पुलिस का खर्च बचेगा जो गरीबों के उत्थान में काम आएगा, जापान इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है , जापान के नागरिक इतने राष्ट्रवादी है की पिछले तीन वर्ष में वहां की पुलिस ने एक भी आपराधिक मुकदमा किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ दर्ज नहीं करवाया है , और तो और पिछले १ वर्ष में जापान देश के किसी भी पुलिस स्टेशन में एक भी प्राथमिकी ( FIR ) दर्ज नहीं की गई है। तो क्या हम जापान से भी गए गुजरे है ?

यदि नहीं तो फिर आइये कुछ संकल्प करें राष्ट्रहित के लिए :

जो भी इस लेख को पढ़े वह एक दृढ निश्चय करे की सदैव एक ईमानदार और राष्ट्रवादी नागरिक बनूँगा।और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करूँगा , रात के तीन बजे भी यदि पूरा रोड खाली होने के बाद भी यदि लाल बत्ती ( रेड लाइट) होती है तो रुक कर हरी होने का इन्तजार करूँगा।

राष्ट्र के विरुद्ध कोई भी कुछ भी गलत करता पाए जाए तो उसका तुरंत प्रतिकार करूँगा। ज्ञात रहे की सड़क पर थूकना, कचरा फेंकना, रेड लाइट क्रॉस करना, थोड़े से लालच में बिना बिल के सामान खरीदना  भी राष्ट्र धर्म के विपरीत कार्य ही है।

विदेशी वस्तुओं का पूर्ण बहिष्कार करें ! चाहे  कितना ही आवश्यक क्यों न हो, कितनी ही सस्ती क्यों न हो ? हर वास्तु का स्वदेशी विकल्प दुकानों पर उपलब्ध है, उनका क्रय करें और उपयोग करें।  जब आप विदेशी वस्तुएं क्रय करना ही बंद कर देंगे तो दुकानदार स्वतः ही स्वदेशी सामान बेंचने लग जाएगा। ये निर्णय लेना बहुत कठिन नहीं है।        

यदि हम ऐसा कर लेते है तब तो इस देश का कुछ हो सकता है, भ्रष्टाचार रुपी राक्षस का अंत होकर देश रामराज्य की ओर तभी जा सकता है जब देश का आम आदमी ठान ले, अन्यथा एक नरेंद्र मोदी तो क्या स्वर्ग से भगवान् भी उतरकर आ जाए तो भी भारत देश का कुछ नहीं हो सकता।


प्रत्येक हिन्दू के लिए गहरी चिंता का विषय है कि, हिन्दू युवा तेजी से नास्तिक क्यों हो रहे है?

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