नई दिल्ली | देश में रोहिंग्या मुस्लिम्स की मौजूदगी हो या न हो इस पर एक
बहस छिड़ी हुई है, आपको बता दें कि रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से निष्काषित
वे लोग है जिनकी सन 1982 से वहां की सरकार के साथ तनातनी चल रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी म्यांमार की सरकारी यात्रा पर है और वहां पर
उन्होंने इस मुद्दे पर कोई द्विपक्षीय चर्चा वहां की सरकार के साथ नहीं की। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने भी मंगलवार को रोहिंग्या
मुस्लिमों को देश से निर्वासित करने के सरकारी फैसले का बचाव किया। किरण
रिजिजू ने प्रेस को बताया कि रोहिंग्या मुस्लिम अवैध रूप से भारत में रह
रहे है और उनके पास कोई भी वैध कागजात नहीं है अतः सामान्य भारतीयों की
तरह समान अधिकार उनके पास नहीं हैं। रिजिजू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संगठन
व मानव अधिकार संस्थायें सरकार को जो दोष दे रही है कि, सरकार रोहिंग्या
मुस्लिमों के प्रति कठोर हो रही है, ऐसे आरोप लगाना सही नहीं है।

रिजिजू ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि , "मैं यह बात साफ कर दूं कि रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं और भारतीय नागरिक नहीं हैं. इसलिए वे किसी चीज के हकदार नहीं हैं, जिसका कि कोई आम भारतीय नागरिक हकदार है." उन्होंने यह भी कहा कि रोहिंग्या लोगों को देश से निकालना पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया पर आधारित है। उन्होंने कहा कि , "रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं और कानून के मुताबिक- उन्हें निर्वासित होना है, इसलिए हमने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे रोहिंग्या मुस्लिमों की पहचान के लिए कार्यबल गठित करें और उनके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करें, यह पूरी तरह से वैध प्रक्रिया है।" यद्यपि उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहां लोकतांत्रिक परंपरा है। उन्होंने कहा कि, "हम उन्हें समुद्र में फेंकने या गोली मारने नहीं जा रहे हैं, हम पर क्यों बहुत अमानवीय होने का आरोप लगाया जा रहा है ?"

रिजिजू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन अनावश्यक रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि , "भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा शरणार्थियों को जगह दी है, इसलिए कोई भारत को ये न सिखाए कि शरणार्थियों से किस तरह निपटा जाए।" यहाँ आपको ये भी पता होना चाहिए कि रिजिजू ने कुछ दिनों पहले ही संसद में कहा था कि केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि रोहिंग्या सहित अन्य सभी अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाए।

रिजिजू ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि , "मैं यह बात साफ कर दूं कि रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं और भारतीय नागरिक नहीं हैं. इसलिए वे किसी चीज के हकदार नहीं हैं, जिसका कि कोई आम भारतीय नागरिक हकदार है." उन्होंने यह भी कहा कि रोहिंग्या लोगों को देश से निकालना पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया पर आधारित है। उन्होंने कहा कि , "रोहिंग्या अवैध प्रवासी हैं और कानून के मुताबिक- उन्हें निर्वासित होना है, इसलिए हमने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे रोहिंग्या मुस्लिमों की पहचान के लिए कार्यबल गठित करें और उनके निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करें, यह पूरी तरह से वैध प्रक्रिया है।" यद्यपि उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जहां लोकतांत्रिक परंपरा है। उन्होंने कहा कि, "हम उन्हें समुद्र में फेंकने या गोली मारने नहीं जा रहे हैं, हम पर क्यों बहुत अमानवीय होने का आरोप लगाया जा रहा है ?"

रिजिजू ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन अनावश्यक रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि , "भारत ने दुनिया में सबसे ज्यादा शरणार्थियों को जगह दी है, इसलिए कोई भारत को ये न सिखाए कि शरणार्थियों से किस तरह निपटा जाए।" यहाँ आपको ये भी पता होना चाहिए कि रिजिजू ने कुछ दिनों पहले ही संसद में कहा था कि केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि रोहिंग्या सहित अन्य सभी अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाए।

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