Friday, November 3, 2017

कार्तिक पूर्णिमा २०१७ : कार्तिक पूर्णिमा का वैदिक महत्व, पूजा विधि और व्रत कथा

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 शनिवार ४ नवम्बर २०१७ को कार्तिक मास की पूर्णिमा है। शास्त्रों में  कार्तिक माह बहुत ही पवित्र माह माना जाता है, विशेषतया  कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इ्स दिन स्नान और दान का विशेष महत्व है, इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदी सरोवर में स्नान करने से सभी जन्मों के पापों से मुक्ति होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है।  इस विशेष दिवस पर शास्त्र सम्मत पूजा अर्चना करना बहुत ही फलदायी होता है  फलस्वरूप इससे समृद्धि आकर जातक के सभी  कष्ट दूर हो जाते  हैं।


सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों और नदी सरोवर तटों पर इस दिन बहुत भीड़ भाड़ होती है इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।  इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान कर दीप दान और वस्तु दान करते हैं।  इलाहाबाद, वाराणसी, अयोध्या, पुष्कर, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे शहरों में यह पर्व  बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।  कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान और उपवास करने से सहस्त्र अश्वमेघ और सौ राजसूय यज्ञ का पुण्य और फल प्राप्त होता है।

इस दिन की पूजा विधि
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्य देवता को जल से अर्घ्य करें,  जल में चावल और  लाल पुष्प, कुमकुम आदि  भी डालें।
  • स्नान के पश्चात घर के मुख्यद्वार पर आम अथवा अशोक के पत्तों का बंदनवार बनाकर बांधे।
  • किसी जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र, आभूषण आदि  सामर्थ्यानुसार दान करें।
  • संध्या काल में तुलसी के पास घी का दीप जलाएं और तुलसी मैया की परिक्रमा करें.
  • चंद्रोदय के समय समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन अवश्य करें इस से भगवानशिव भोलेनाथ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते है।
कार्तिक पूर्णिमा की कथा और रहस्य
शास्त्रों में उल्लेखित है कि कार्तिक पूर्णिमा को ही भगवान शिव ने त्रिपुर नामक राक्षस का वध किया था।  त्रिपुर ने तीनों लोकों में अजेय होने के लिए एक लाख वर्ष तक प्रयाग तीर्थ में कठिन तपस्या कर ब्रह्मा जी से मनुष्य और देवताओं के हाथों ना मारे जाने का वरदान हासिल किया था।  इसके बाद भगवान शिव ने ही उसका संहार कर के संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी।

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वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी, विक्रम सम्वत २०७४, शुक्रवार, ०३ नवम्बर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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शुक्रवार, ०३ नवम्बर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार

सूर्योदय: ०६:३३, सूर्यास्त: १७:४७, चन्द्रोदय: १७:२५, चन्द्रास्त: ३०:२३+, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: मेष, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष

युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: चतुर्दशी - १३:४६ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण

नक्षत्र: अश्विनी - २७:२९+ तक, योग: वज्र - १०:४२ तक, प्रथम करण: वणिज - १३:४६ तक, द्वितीय करण: विष्टि - २४:२२+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४८ - १२:३२ तक, अमृत काल: २०:५३ - २२:२१ तक,  आनन्दादि योग: वज्र - २७:२९+ तक, तमिल योग: मरण - २७:२९+ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: ०८:५० - ०९:३४ तक, वर्ज्य: २३:४९ - २५:१७+ तक, राहुकाल : १०:४६ - १२:१० तक, गुलिक काल: ०८:०० - ०९:२३ तक, यमगण्ड: १४:५६ - १६:२० तक।

दिशा शूल:
पश्चिम में

दैनिक उपवास और त्यौहार
मणिकर्णिका स्नान
चौमासी चौदस
देव दीवाली

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Thursday, November 2, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी, विक्रम सम्वत २०७४, बृहस्पतिवार, ०२ नवम्बर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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 बृहस्पतिवार, ०२ नवम्बर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार।
सूर्योदय: ०६:३२, सूर्यास्त: १७:४८, चन्द्रोदय: १६:४१, चन्द्रास्त: २९:२१+, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: मीन, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष

युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: त्रयोदशी - १६:११ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद - ०६:५६ तक, योग: हर्षण - १३:४७ तक, प्रथम करण: तैतिल - १६:११ तक, द्वितीय करण: गर - २७:०३+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४८ - १२:३२, अमृत काल: २७:१४+ - २८:४४+ तक,  आनन्दादि योग: छत्र - ०६:५६ तक, तमिल योग: सिद्ध - ०६:५६ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: १०:१८ - ११:०३ तक, वर्ज्य: १८:१३ - १९:४३ तक, राहुकाल : १३:३३ - १४:५७ तक, गुलिक काल: ०९:२३ - १०:४६ तक, यमगण्ड: ०६:३६ - ०७:५९ तक।

दिशा शूल:
दक्षिण में

दैनिक उपवास और त्यौहार
वैकुण्ठ चतुर्दशी
विश्वेश्वर व्रत

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Wednesday, November 1, 2017

भारत की महान विभूतिया : नारी शक्ति की प्रेरणा स्त्रोत भारत की महान पुत्री भगिनी निवेदिता और उनकी जीवन गाथा


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28 अक्तूबर, 1867 को जन्मी मार्गरेट के पिता सैम्युअल नोबल आयरिश चर्च में पादरी थे। भारत के महान संत स्वामी विवेकानन्द के जीवन से प्रभावित होकर आयरलैण्ड की एक युवती मार्गरेट नोबेल ने अपना जीवन भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया । प्राकृतिक आपदाएं जैसे कि प्लेग, बाढ़, अकाल आदि में उन्होंने निस्वार्थ और पूर्ण समर्पण भाव से देश की आम जनता की सेवा की।

जीवन परिचय
बाल्यकाल से ही मार्गरेट नोबेल की रुचि समाज सेवा के कार्यों में थी। वह निर्धनों व असहायों की झुग्गियों में जाकर उनके बच्चों को शिक्षा दीक्षा के पुण्य कार्य करती  थी। भारत में रहने लगने के पूर्व  एक बार उनके घर पर एक आइरिश पादरी आए और उन्होंने युवती मार्गरेट को कहा कि शायद आपको  भी एक दिन भारत जाना पड़े। तब से मार्गरेट के सपनों में भारत बसने लगा। मार्गरेट के पिता का 34 वर्ष की अल्पायु में ही देहान्त हो गया। मरते समय उन्होंने अपनी पत्नी मेरी से कहा कि यदि मार्गरेट कभी भारत जाना चाहे, तो उसे रोकना नहीं। पति की मृत्यु के बाद मेरी अपने मायके आ गयी। वहीं मार्गरेट की शिक्षा पूर्ण हुई। 17 साल की अवस्था में मार्गरेट एक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाने लगी। कुछ समय बाद उसकी सगाई हो गयी; पर विवाह से पूर्व ही उसके मंगेतर की बीमारी से मृत्यु हो गयी। इससे मार्गरेट का मन संसार से उचट गया; पर उसने स्वयं को विद्यालय में व्यस्त कर लिया।

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स्वामी विवेकानन्द जी से भेंट
1895 में एक दिन मार्गरेट की सहेली लेडी इजाबेल मारगेसन ने उसे अपने घर बुलाया। वहाँ स्वामी विवेकानन्द आये हुए थे। स्वामी जी 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में भाषण देकर प्रसिद्ध हो चुके थे। उनसे बात कर मार्गरेट के हृदय के तार झंकृत हो उठे। फिर उसकी कई बार स्वामी जी भेंट हुई। जब स्वामी जी ने भारत की दुर्दशा का वर्णन किया, तो वह समझ गयी कि वह जिस बुलावे की प्रतीक्षा में थी, वह आ गया है। वह तैयार हो गयी और 28 जनवरी, 1898 को कोलकाता आ गयी। यहाँ आकर उन्होंने सबसे पहले बंगला भाषा सीखी; क्योंकि इसके बिना निर्धन और निर्बलों के बीच काम करना सम्भव नहीं था। 25 मार्च, 1898 को विवेकानन्द ने मार्गरेट को भगवान शिव की पूजा विधि सिखायी और उसे ‘निवेदिता’ नाम दिया। इसके बाद उसने स्वामी जी के साथ अनेक स्थानों का प्रवास किया। लौटकर उसने एक कन्या पाठशाला प्रारम्भ की। इसमें बहुत कठिनाई आयी। लोग लड़कियों को पढ़ने भेजना ही नहीं चाहते थे। धन का भी अभाव था; पर वह अपने काम में लगी रही।

1899 में कोलकाता में प्लेग फैल गया। निवेदिता सेवा में जुट गयीं। उन्होंने गलियों से लेकर घरों के शौचालय तक साफ किये। धीरे-धीरे उनके साथ अनेक लोग जुट गये। इससे निबट कर वह विद्यालय के लिए धन जुटाने विदेश गयीं। दो साल के प्रवास में उन्होंने धन तो जुटाया ही, वहाँ पादरियों द्वारा हिन्दू धर्म के विरुद्ध किये जा रहे झूठे प्रचार का भी मुँहतोड़ उत्तर दिया। वापस आकर वह स्वतन्त्रता आन्दोलन में भी सक्रिय हुईं। उनका मत था कि भारत की दुर्दशा का एक कारण विदेशी गुलामी भी है। बंग भंग का उन्होंने प्रबल विरोध किया और क्रान्तिगीत ‘वन्दे मातरम्’ को अपने विद्यालय में प्रार्थना गीत बनाया। उन्होंने अनेक पुस्तकें भी लिखीं। अथक परिश्रम के कारण वह बीमार हो गयीं। 13 अक्तूबर, 1911 को दार्जिलिंग में उनका देहान्त हुआ। मृत्यु से पूर्व उन्होंने अपनी सारी सम्पत्ति बेलूर मठ को दान कर दी। उनकी समाधि पर लिखा है - यहाँ भगिनी निवेदिता चिरनिद्रा में सो रही हैं, जिन्होंने भारत के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया

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वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल द्वादशी, विक्रम सम्वत २०७४, बुधवार, ०१ नवम्बर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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बुधवार, ०१ नवम्बर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार
सूर्योदय: ०६:३६, सूर्यास्त: १७:४३, चन्द्रोदय: १६:००, चन्द्रास्त: २८:२१+, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: मीन, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: द्वादशी - १७:५६ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद - ०७:४१ तक, योग: व्याघात - १६:२० तक, प्रथम करण: बालव - १७:५६ तक, द्वितीय करण: कौलव - २९:०९+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं, अमृत काल: २६:१७+ - २७:५०+ तक,  आनन्दादि योग: पद्म - ०७:४१ तक, तमिल योग: सिद्ध - ०७:४१ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: ११:४८ - १२:३२ तक, वर्ज्य: १६:५९ - १८:३२ तक, राहुकाल : १२:१० - १३:३२ तक, गुलिक काल: १०:४७ - १२:१० तक, यमगण्ड: ०८:०२ - ०९:२५ तक।

दिशा शूल:   
उत्तर में

दैनिक उपवास और त्यौहार

  • देवुत्थान एकादशी पारण
  • तुलसी विवाह
  • योगेश्वर द्वादशी
  • प्रदोष व्रत
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Sunday, October 29, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल नवमी, विक्रम सम्वत २०७४, रविवार, २९ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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रविवार, २९ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार
सूर्योदय: ०६:३४, सूर्यास्त: १७:४६, चन्द्रोदय: १४:०२, चन्द्रास्त: २५:२८+, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: मकर, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: नवमी - १८:२० तक।   

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: धनिष्ठा - पूर्ण रात्रि तक, योग: गण्ड - २०:०४ तक, प्रथम करण: कौलव - १८:२० तक, द्वितीय करण: तैतिल - पूर्ण रात्रि तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४८ - १२:३२ तक, अमृत काल: १९:३६ - २१:१९ तक,  आनन्दादि योग: मातंग, तमिल योग: अमृत।

अशुभ समय

दूमुहूर्त: १६:१३ - १६:५८ तक, वर्ज्य: ०९:२० - ११:०३ तक, राहुकाल : १६:१९ - १७:४२ तक, गुलिक काल: १४:५६ - १६:१९ तक, यमगण्ड: १२:१० - १३:३३ तक।

दिशा शूल:   
पश्चिम में

दैनिक उपवास और त्यौहार
  • अक्षय नवमी
  • जगद्धात्री पूजा

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Saturday, October 28, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल अष्टमी, विक्रम सम्वत २०७४, शनिवार, २८ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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शनिवार, २८ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार
सूर्योदय: ०६:३३, सूर्यास्त: १७:४६, चन्द्रोदय: १३:२१, चन्द्रास्त: २४:३४+, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: मकर, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: अष्टमी - १६:५१ तक।   

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: श्रवण - २९:०३+ तक, योग: शूल - २०:०३ तक, प्रथम करण: बव - १६:५१ तक, द्वितीय करण: बालव - २९:४१+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४८ - १२:३२ तक, अमृत काल: १७:३८ - १९:२३ तक,  आनन्दादि योग: स्थिर - २९:०३+ तक, तमिल योग: अमृत - २९:०३+ तक।
   
अशुभ समय
दूमुहूर्त: ०६:३७ - ०७:२२ तक, वर्ज्य: ०७:०५ - ०८:५१ तक, राहुकाल : ०९:२४ - १०:४७ तक, गुलिक काल: ०६:३७ - ०८:०० तक, यमगण्ड: १३:३३ - १४:५६ तक।

दिशा शूल:   
पूर्व में

Friday, October 27, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल सप्तमी, विक्रम सम्वत २०७४, शुक्रवार, २७ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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शुक्रवार, २७ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार।

सूर्योदय: ०६:३३, सूर्यास्त: १७:४७, चन्द्रोदय: १२:३७, चन्द्रास्त: २३:४१, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: धनु ०६:३७ तक, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।
 
हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: सप्तमी - १४:४४ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: उत्तराषाढा - २६:४२+ तक, योग: धृति - १९:३४ तक, प्रथम करण: वणिज - १४:४४ तक, द्वितीय करण: विष्टि - २७:५१+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४८ - १२:३२ तक, अमृत काल: १९:३३ - २१:२० तक,  आनन्दादि योग: आनन्द - २०:०० तक, तमिल योग: सिद्ध - २०:०० तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: ०८:५० - ०९:३४ तक, वर्ज्य: ०८:४९ - १०:३६ तक, राहुकाल : १०:४७ - १२:१० तक, गुलिक काल: ०८:०० - ०९:२३ तक, यमगण्ड: १४:५७ - १६:२० तक।

दिशा शूल:
पश्चिम में

दैनिक उपवास और त्यौहार
अष्टाह्निका विधान प्रारम्भ

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Thursday, October 26, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल षष्ठी, विक्रम सम्वत २०७४, बृहस्पतिवार, २६ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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बृहस्पतिवार, २६ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार :

सूर्योदय: ०६:३२, सूर्यास्त: १७:४८, चन्द्रोदय: ११:५२, चन्द्रास्त: २२:५०, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: धनु, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ ,मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: षष्ठी - १२:१५ तक।   

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: पूर्वाषाढा - २३:५२ तक, योग: सुकर्मा - १८:४४ तक, प्रथम करण: तैतिल - १२:१५ तक, द्वितीय करण: गर - २५:३२+ तक।   

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४८ - १२:३२, अमृत काल: १८:२८ - २०:१६ तक,  आनन्दादि योग: धाता/प्रजापति - २३:५२ तक, तमिल योग: सिद्ध - २३:५२ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: १०:१९ - ११:०३ तक, वर्ज्य: ०७:३८ - ०९:२७ तक, राहुकाल : १३:३४ - १४:५७ तक, गुलिक काल: ०९:२३ - १०:४७ तक, यमगण्ड: ०६:३६ - ०८:०० तक।

दिशा शूल:   
दक्षिण में

दैनिक उपवास और त्यौहार
छठ पूजा

Wednesday, October 25, 2017

छठ पूजा विशेष: सूर्योपासना के महापर्व छठ पर्व का महत्व, और षष्ठी पूजा की कथा

 
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सनातन धर्म के सबसे बड़े पर्व दीपावली के छह दिन बाद अर्थात कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ पर्व आता है। इस पर्व को भारत के विभिन्न भागों में छठ, छठी, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी आदि अनेक नामों से पुकारा और मनाया जाता है।

छठ पूजा की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंकाधीश रावण के वध के पश्चात दीपावली के दिन भगवान राम अयोध्या पहुंचे और उन्हें वहां का राजा बना दिया गया। रावण वध के पाप से मुक्ति के लिए भगवान श्री राम ने राज पुरोहित की सलाह से राज सूर्य यज्ञ का महा आयोजन किया। इस यज्ञ के आयोजन हेतु   अयोध्या में मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया गया। मुग्दल ऋषि ने माता सीता को कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को भगवान् सूर्यदेव की उपासना करने की सलाह दी। मां सीता मुग्दल ऋषि के बताये उपाय के अनुसार ही मुद्गल ऋषि के आश्रम में रहकर छह दिनों तक भगवान सूर्यदेव की उपासना की और भगवान् राम को रावण वध के पाप से मुक्ति दिलवाई।  तब से ही यह पर्व छठ पूजा पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष छठ पूजा अथवा षष्ठी का पर्व 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

छठ पूजा विशेष २०१७ : इस समय पर करेंगे छठ पूजा, तो अवश्य प्रसन्न होगी माँ

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शुभ चौघडिय़े में प्रारम्भ किया गया कार्य अवश्य सिद्ध होता है ,जबकि अशुभ चौघडिय़े में प्रारम्भ  किये कार्य में बाधाएं आती है।
प्रात: 6 बजे से 7.30 तक शुभ का चौघड़िया
प्रात: 7.30 बजे से 9 बजे तक रोग का चौघड़िया
प्रात: 9 बजे से 10.30 बजे तक उद्वेग का चौघड़िया
प्रात: 10.30 बजे से 12 बजे तक चर का चौघड़िया
दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक लाभ का चौघड़िया
दोप. 1.30 बजे से 3 बजे तक अमृत का चौघड़िया
दोप. 3 बजे से 4.30 बजे तक काल का चौघड़िया
शाम 4.30 बजे से 6 बजे तक शुभ का चौघड़िया
शाम 6 बजे से 7.30 तक अमृत का चौघड़िया
शाम 7.30 बजे से 9 बजे तक चर का चौघड़िया
रात 9 बजे से 10.30 बजे तक रोग का चौघड़िया
रात 10.30 बजे से 12 बजे तक काल का चौघड़िया
रात 12 बजे से 1.30 बजे तक लाभ का चौघड़िया
रात 1.30 बजे से 3 बजे तक उद्वेग का चौघड़िया
रात 3 बजे से 4.30 बजे तक शुभ का चौघड़िया
रात 4.30 बजे से 6 बजे तक अमृत का चौघड़िया

शुभ चौघडिय़े- अमृत, शुभ, लाभ और चर हैं।
अशुभ चौघडिय़े- उद्वेग, रोग तथा काल हैं।

वैदिक पंचांग: कार्तिक शुक्ल पंचमी, विक्रम सम्वत २०७४, बुधवार, २५ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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बुधवार, अक्टूबर २५, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार
सूर्योदय: ०६:३२, सूर्यास्त: १७:४९, चन्द्रोदय: ११:०४, चन्द्रास्त: २२:०१, सूर्य राशि: तुला, चन्द्र राशि: धनु, सूर्य नक्षत्र: स्वाती, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: शुक्ल, तिथि: पञ्चमी - ०९:३७ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण

नक्षत्र: मूल - २०:४९ तक, योग: अतिगण्ड - १७:४६ तक, प्रथम करण: बालव - ०९:३७ तक, द्वितीय करण: कौलव - २२:५६ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: कोई नहीं , अमृत काल: १३:३६ - १५:२४ तक,  आनन्दादि योग: केतु/ध्वज - २०:४९ तक, तमिल योग: सिद्ध - २०:४९ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: ११:४८ - १२:३३ तक, वर्ज्य: १९:०१ - २०:४९ तक, राहुकाल : १२:१० - १३:३४ तक, गुलिक काल: १०:४६ - १२:१० तक, यमगण्ड: ०७:५९ - ०९:२३ तक। 

दिशा शूल:
   
उत्तर में

दैनिक उपवास और त्यौहार
लाभ पञ्चमी

Saturday, October 14, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक कृष्ण दशमी, विक्रम सम्वत २०७४, शनिवार, १४ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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शनिवार, अक्टूबर १४, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार
सूर्योदय: ०६:२१, सूर्यास्त: १७:५२, चन्द्रोदय: २५:५०+, चन्द्रास्त: १४:३३, सूर्य राशि: कन्या, चन्द्र राशि: कर्क, सूर्य नक्षत्र: चित्रा, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: कृष्ण पक्ष, तिथि: दशमी - २६:०३+ तक।
   
नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: पुष्य - ०६:५४ तक, योग: साध्य - २३:०४ तक, प्रथम करण: वणिज - १४:४० तक, द्वितीय करण: विष्टि - २६:०३+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४४ - १२:२९ तक , अमृत काल: २८:४७+ - ३०:२१+ तक,  आनन्दादि योग: मित्र - ०६:५४ तक, तमिल योग: अमृत - ०६:५४ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: ०६:२५ - ०७:१० तक, वर्ज्य: १९:२४ - २०:५८ तक, राहुकाल : ०९:१५ - १०:४१, गुलिक काल: ०६:२५ - ०७:५० तक, यमगण्ड: १३:३२ - १४:५७ तक।

दिशा शूल:   
पूर्व में

Friday, October 13, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक कृष्ण नवमी, विक्रम सम्वत २०७४, शुक्रवार, १३ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

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शुक्रवार, १३ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार
सूर्योदय: ०६:२०, सूर्यास्त: १७:५३, चन्द्रोदय: २४:४९+ , चन्द्रास्त: १३:४४, सूर्य राशि: कन्या, चन्द्र राशि: कर्क, सूर्य नक्षत्र: चित्रा, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष
युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: कृष्ण पक्ष, तिथि: नवमी - २७:२१+ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण
नक्षत्र: पुनर्वसु - ०७:४६ तक, योग: सिद्ध - २५:१७+ तक, प्रथम करण: तैतिल - १६:०८ तक, द्वितीय करण: गर - २७:२१+ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४४ - १२:३० तक , अमृत काल: २४:४४+ - २६:१६+ तक,  आनन्दादि योग: लुम्बक - ०७:४६ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: ०८:४१ - ०९:२७ तक, वर्ज्य: १५:२९ - १७:०१ तक, राहुकाल : १०:४१ - १२:०७, गुलिक काल: ०७:५० - ०९:१५ तक, यमगण्ड: १४:५८ - १६:२४ तक।

दिशा शूल: पश्चिम में

Thursday, October 12, 2017

वैदिक पंचांग: कार्तिक कृष्ण सप्तमी, विक्रम सम्वत २०७४, बृहस्पतिवार, १२ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त

 
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बृहस्पतिवार, १२ अक्टूबर, २०१७ का पंचांग व शुभ मुहूर्त, भारतीय समयानुसार

सूर्योदय: ०६:१९, सूर्यास्त: १७:५४, चन्द्रोदय: २३:४८ , चन्द्रास्त: १२:५०, सूर्य राशि: कन्या,
चन्द्र राशि: मिथुन, सूर्य नक्षत्र: चित्रा, वैदिक अयन: दक्षिणायण, वैदिक ऋतु: शरद।

हिंदी ,दिनांक,तिथि और वर्ष

युगाब्द: ५११९, शक सम्वत: १९३९, हेमलम्बी, विक्रम सम्वत: २०७४ साधारण, गुजराती सम्वत:२०७३ , मास: कार्तिक, पक्ष: कृष्ण पक्ष, तिथि: सप्तमी - ०६:५५ तक, क्षय तिथि: अष्टमी - २८:५९+ तक।

नक्षत्र, योग तथा करण

नक्षत्र: आर्द्रा - ०८:५८ तक योग: परिघ - ०६:३० तक, प्रथम करण: बव - ०६:५५ तक, द्वितीय करण: बालव - १७:५५ तक।

शुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: ११:४४ - १२:३० तक , अमृत काल: २९:२९+ - ३१:०१+ तक,  आनन्दादि योग: काण - ०८:५८ तक।

अशुभ समय
दूमुहूर्त: १०:१२ - १०:५८ तक, वर्ज्य: २०:२२ - २१:५३ तक, राहुकाल : १३:३३ - १४:५९, गुलिक काल: ०९:१५ - १०:४१ तक, यमगण्ड: ०६:२३ - ०७:४९ तक।

दिशा शूल: दक्षिण में